आओ रोटी सेंकें .....
आप सोच रहे होंगे कि मै ये क्या कह रहा हूं . जी बिल्कुल सही कह रहा हूँ . उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा आई, मतलब चूल्हा मिल गया। लोग मर गए,,,, लो जी आग भी तैयार ....बस अब सारे नेता और छुटभईये नेता आ जाओ ....अपनी अपनी रोटी सेंको . थोड़ा बुरा लग रहा होगा . अजी थोड़ा क्या पूरा बुरा लगा होगा. खबरिया चैनल वाले भी कुछ रोटी सेंक लेंगे . कुछ फेसबूकेर भी रोटी सेंकने की कोशिश करेंगे . पार्टी कोई भी हो ......कुछ भी करेंगे तो उन्हें नाम चाहिए , लोकप्रियता चाहिए ,
जब सामान बाँटने , माफ़ करना .......मदद करने जायंगे तो पोस्टर लगा के जायेंगे . लेकिन हम तो ऐसे है जो घर में खुद को तो बंद कर ही रखा था अब अपनी जमीर और स्वतंत्र सोच को भी किसी अलादीन के चिराग में बंद कर दिया है. जब कोई धिसेगा तो तो धुंए के साथ बहार आयेगा. अरे प्रभु उठो और सोचो , किसे आप अपना मालिक बना रहे हो. नोट के चोट पर जब वोट जायेगा तो कोट तो होगा ही . आपके हमारे पैसे से ये जाली नोट के जैसे जाली देशभक्त और जाली समाजसेवक बर्वाद कर रहे है. अभी भी सिर्फ आटा गुंथा गया है , रोटी मत सेंकने दो.
वर्ना ये सब तो कह ही रहे है ,,,,,,,जिन्दा मुर्दा सो रहा है. सोये में अगर मर गया तो अति सुन्दर. तो प्रभु कुछ तो करना होगा. राम कृष्णा या बुद्ध आयेंगे तो बस आप या मेरे जैसे ही होंगे . पर होंगे तो हम ही . तो फिर इंतजार क्या ? जागो और जरा सोचो .............
नालंदा खुला विश्वविद्यालय
दूसरा वर्ष
पुष्पराज गुंजन
bjmc
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