भारत में दो चीज़ें बड़ी आसानी से बिक जाती है. एक है धर्म और दूसरा है सेक्स. सेक्स तो हर जगह बिकती है पर धर्म भारत में खुलेआम मंहगा और सस्ता बिकता है. बेचने वाले के नाम में नन्द और बाबा के साथ स्वामी लगा होता है. इसे बढ़ावा देने में आज के दौर का यश देवता मीडिया महाराज का बड़ा योगदान है. पहले ये बाबा को अपने फायदे के लिए सर्वोच्च शिखर पर बैठा देते है और फिर उनके पुराने जिन्दगी के बारे में खंगाल कर उनको रसातल में पहुंचा देते है. पैसा तो सबको चाहिए, कोई धर्म फैला कर तो कोई धर्म को बेच कर तो कोई धर्म को नीचा दिखा कर. पर ऐसा क्यों? किसी और देश में इतने न तो धर्म होते है न इतने धर्म के ठेकेदार. पर भारत में जन्म से मरण तक विभिन्न कार्यों को धर्म का रूप दे कर हमें धार्मिक बनाया जाता है. तो फिर धर्म का यह ठेका चलेगा ही.
किसी भी सभ्यता में ये ठेकेदार मिल जाते है. वक़्त के हिसाब से स्वरुप अलग अलग हो जाते है पर ख़तम नहीं होते. हर इन्सान कम मेहनत में ज्यादा पाना चाहता है. इस काम में मदद करते है ये बाबा. बाबा भगवान् के जमीनी मंत्री या संतरी है. आपके दर्द का फॉर्म भर कर उनके यहाँ पहुँचाने का काम इनके हिस्से में है. पर क्या ये काम होते भी है? कौन जाने? मै नास्तिक नहीं हूँ. मै भी प्रभु के सत्ता को मानता हूँ. पर प्रभु इतने आडम्बरों को करवाते है ये मालूम नहीं है. ईश्वर है.. उनके कार्य है ..पर उनके कार्य में ये बाबा क्या काम करते है? या तो हमें अपनी बातो में बहका कर अपना काम निपटाते है ? या फिर सही में सीधा सम्बन्ध रखते है? पर हकीकत क्या है.......? ये तो ?????///जरा सोचो .
so nice gunjan ji
ReplyDeletedharmiktv.com
https://www.youtube.com/watch?v=pFFwNDdi7gg
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